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सिर्फ वीक डे पर शूटिंग की और बना ली फीचर फिल्म, 25 को होगी रिलीज

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निर्देशक मोहसिन खान की डेब्यू फीचर फिल्म है प्यार, किस्मत और जयपुर जंक्शन   जयपुर। क्या कोई सिफ छुट्टी के दिनों शनिवार, रविवार को ही शूट करके फीचर फिल्म बना सकता है? सवाल शायद अटपटा लगे, लेकिन शहर के एक युवा ने ऐसा करके दिखा दिया है। फिल्म मेकर मोहसिन खान ने वाकई इसी तरह […]

DHARAM/SAMAJ

सम्मेलन में 51 जोड़ों के सामूहिक विवाह का लक्ष्य

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महात्मा ज्योतिबा फुले राष्ट्रीय संस्थान की ओर से बसंत पंचमी पर किए जाने वाले सम्मेलन की तैयारियों को लेकर बैठक जयपुर। महात्मा ज्योतिबा फुले राष्ट्रीय संस्थान की ओर से बसंत पंचमी को सामूहिक विवाह सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। इसकी तैयारियों के लिए के लिए संस्थान में एक बैठक अध्यक्ष मांगीलाल पंवार की अध्यक्षता में […]

EDUCATION

10 सीजीपीए के साथ स्टूडेंट्स ने बढ़ाया एमपीएस इन्टरनेशनल का गौरव

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प्राचार्य व सचिव ने सफल विद्यार्थियों को इसी प्रकार आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा देते हुए दी शुभकामनाएं जयपुर। ‘एकेडमिक एक्सीलेंस‘ ही एम.पी.एस. इन्टरनेशनल स्कूल लक्ष्य है, इस बार सीबीएसई दसवीं के परीक्षा परिणाम ने यह बात साबित कर दी। स्कूल के 23 विद्यार्थियों ने 10 सीजीपीए प्राप्त करके स्कूल का नाम उंचा किया है। […]

CRIME/POLICE NEWS

कैब ने पीसीआर को मारी टक्कर, दो पुलिसकर्मियों सहित 3 घायल

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देर रात करीब एक बजे जेएलएन मार्ग स्थित जेडीए सर्किल पर हुआ हादसा   जयपुर। गांधीनगर इलाके में कल देर रात तेज रफ्तार कैब ने पुलिस की पीसीआर वैन को टक्कर मार दी, जिससे दो पुलिसकर्मी और कैब में बैठी सवारी घायल हो गए। जानकारी के अनुसार हादसा देर रात करीब एक बजे जेएलएन मार्ग स्थित […]

Home Health भ्रांतियों से रहें दूर और अपने घुटनों के दर्द को दें मात
भ्रांतियों से रहें दूर और अपने घुटनों के दर्द को दें मात
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भ्रांतियों से रहें दूर और अपने घुटनों के दर्द को दें मात

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नारायणा मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पीटल की ओर से आयोजित बीट द पेन वर्कशॉप में ऑपरेशन करा चुके लोगों ने ही दिए मरीजों के सवालों के जवाब

जयपुर।  नारायणा मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पीटल की ओर से जागरुकता कार्यक्रम बीट द पेन आयोजित किया गया। इसमें खास बात यह रही कि मरीजों के सवालों के जवाब ऑपरेशन करा चुके लोगों ने ही दिए।  इस दौरान घुटना प्रत्यारोपण करा चुके लोगों ने डांस कर साबित कर दिया कि ऑपरेशन के बाद जिंदगी कितनी जिंदादिली से जी सा सकती है। अब तक 3500 से ज्यादा सफल ज्वाइन्ट रिपलेसमेंट और 20 हजार फ्रेक्चर ठीक कर चुके डॉ. विजय शर्मा ने कार्यक्रम में लोगों की हर जिज्ञासा का सटीक और सकारात्मक जवाब दिया।  सवाल-जवाब और कार्यशाला कार्यक्रम में नारायणा मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पीटल के फेसलिटी डायरेक्टर कार्तिक रामाकृष्णन और जोनल क्लिीनिकल डायरेक्टर डॉ. माला ऐरन भी मौजूद थे।

मात्र डेढ़ माह पहले नी ज्वाइंट रिपलेसमेंट कराने वाले 70 साल के गिरधारीलाल ने तो मंच पर ही पालती मारकर, उकड़ू बैठकर हैरत में डाल दिया, जबकि डॉक्टर ऑपरेशन कराने वालों को ऐसा करने से मना करते हैं। गिरधारी ने कहा कि दर्द क्या होता है, उन्हें पता ही नहीं चला। 65 साल से ज्यादा की सुनीता ने कहा कि मैं अक्सर भूल जाती हूं कि मेरा ऑपरेशन भी हुआ है, दर्द नहीं होता तो मन चाहे पालती मार कर बैठ जाती हूं। पहले बैठना तो दूर चलना भी मुश्किल हो जाता था।

कार्यक्रम में 67 साल के कल्याण शर्मा ने बताया कि उनका ज्वाइन्ट बदले अभी 368 दिन हुए हैं, मगर वे रोज 100-150 किलोमीटर गाड़ी चलाते हैं, पांच किलोमीटर पैदल चलते हैं। वहीं 75 साल के टूरिस्ट गाइड आर.एस. पारीक ने तो अपना अनुभव बताकर सबको चौंका दिया। कहा कि, वे ऑपरेशन के बाद अब तक 400 बार आमेर किला पैदल चढ़ चुके हैं। पर्यटकों के साथ रोज 10-12 किलोमीटर पैदल चल लेते हैं। दर्द का कहीं नामोनिशान नहीं है। कई मरीज ऐसे थे जिन्हें 30-40 साल से डायबिटीज, बीपी की परेशानी रही और मोटापा भी बहुत ज्यादा है, मगर ज्वाइन्ट बदलवाने के बाद अब आराम से बिना दर्द के चल पा रहे हैं।

ज्वाइंट पेन बीमारी नहीं

डॉ. विजय शर्मा ने इस मौके पर कहा कि, ऑस्टियो आर्थराइटिस बीमारी नहीं है जिसे दवाईयों से ठीक किया जा सके। यह तो उम्र के साथ होने वाले परिवर्तन हैं जिसके चलते खराब हो जाते हैं और अन्तिम अवस्था में जोड़ प्रत्यारोपण ही अन्तिम विकल्प है। उन्होंने कहा कि 40 से 50 साल की उम्र के बाद जोड़ों में परेशानी के लक्षण आने शुरू होते हैं और इसके बाद दर्द और चलने में परेशानी होने लगती है। देखा जाए तो 80 फीसदी लोगों में 70 साल के बाद आर्थराइटिस की समस्या होने लगती है। महिलाओं में यह समस्या जल्दी और ज्यादा रहती है। उन्होंने कहा कि नई तकनीक से ऑपरेशन के महज 12 धण्टे बाद ही मरीज चलने लगता है।

लक्षण

रोज व रात को तेज दर्द रहना, जकड़न होना, नियमित कामकाज में परेशानी, चलने में परेशानी, चलते वक्त पांव टेढ़े होना

कारण

मोटापा, शारीरिक गतिविधि नहीं करना, व्यायाम नहीं करना, अनियमित जीवनशैली, पौष्टिक खानपान की कमी, भारतीय रीति-रिवाज जिनमें आलती-पालती मार कर बैठना, उकडू बैठना

जागरुकता के लिए प्रयास जारी रहेंगे

नारायणा हॉस्पीटल की जोनल क्लिीनिकल डायरेक्टर डॉ. माला ऐरन ने कहा कि मरीजों के लिए अत्याधुनिक तकनीकों से उपचार देना हमारी पहली प्राथमिकता है। इस तरह के जागरुकता कार्यक्रमों से हम मरीजों को जानकारी देते रहेंगे। फैसिलिटी डायरेक्टर कार्तिक रामाकृष्णन ने कहा कि आमजन को सहज और अच्छी चिकित्सा सुविधा मिलती रहे, यही हमारा प्रयास है।

 

 

 

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